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Bansajhal Mini-Rice Mill



बांसाझाल महिला स्व सहायता संघ द्वारा जैविक जीराफूल चावल प्रसंस्करण

कृषि विज्ञान केन्द्र, अम्बिकापुर द्वारा अंगीकृत चारों ओर पहाडि़यों से घिरा ग्राम बांसाझाल जिला मुख्यालय से लगभग 45 कि.मी. दूरी पर स्थित है। केन्द्र द्वारा इस ग्राम में 14 महिला स्व सहायता समूहों को मिलाकर बांसाझाल महिला स्व सहायता संघ का गठन किया गया है। जिसके द्वारा बांसाझाल क्षेत्र में उत्पादित जीराफूल धान का प्रसंकरण पष्चात् पेकण्ड चावल समूह द्वारा तैयार बांसाझाल प्राकृतिक सुगंधित चावल के नाम से विक्रय किया जा रहा है। कलेक्टर सरगुजा के निर्देशन एवं माननीय कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द, अम्बिकापुर के सहयोग से महिला सदस्यों की आय को बढ़ावा देने हेतु मिनी राइस मिल प्रदान कर बांसाझाल चावल प्रसंस्करण इकाई की स्थापना की गई। ताकि महिलाएं धान उत्पादन कर आसानी से चावल प्रसंस्कृत कर विक्रय कर सकें। पूर्व में महिलाओं द्वारा स्थानीय ढेंकी से चावल तैयार कर बेचा जा रहा था। माननीय डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री, छ.ग. शासन एवं मान. श्री कमलभान सिंह मरावी, सासंद सरगुजा के मुख्य आथित्य में इस बांसाझाल चावल प्रसंस्करण इकाई का लोकार्पण दिनांक 16 मार्च 2015 को किया गया। कृषि विज्ञान केन्द द्वारा आदिवासी उपयोजना अंतर्गत 150 एकड़ क्षेत्र में प्रदर्षन कार्यक्रम लिया जायेगा जिसमें स्व सहायता समूहों की महिलाओं को धान बीज, जैविक उर्वरक, पौध संरक्षण हेतु दवाईयां, अम्बिका ताउची, स्प्रेयर अनुदान के रूप में दी जायेगी। समूह द्वारा 150 एकड़ क्षेत्र में उत्पादित लगभग .....क्विंटल जैविक जीराफूल के प्रसंस्करण द्वारा लगभग रूपये .......लाख का चावल विक्रय किया जाना संभावित है।
उद्देश्य/मुख्य बिन्दु:-
1. एस. आर. आई. पद्वति से जैविक धान उत्पादन।
2. परम्परागत खेती से उन्नत खेती की ओर कदम।
3. जैविक खेती में स्थिरता एवं चावल की गुणवत्ता को कायम रखना।
4. महिला सशक्तिकरण की दिशा में आत्म निर्भरता।
5. स्वयं सहायता समूह में आपसी एकता एवं संगठन।
6. सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण।

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